Sunday, January 13, 2013
Sunday, January 6, 2013
ज़रा-सा
आलम यूँ दिल का बख़ूबी बताया..
छुपाईं बोहोत सारी बातें भी तुमसे...
मगर प्यार दिल का कभी न छुपाया।..
ज़रा-सा लिखा और बोहोत कुछ मिटाया..
आलम यूँ दिल का बख़ूबी बताया..
वो झगड़े की जिन में उलझ सा गया प्यार अपना जो लगता था सुलझा कभी...
वो शक की तपिश में झुलस सा गया मन का विशवास मुझपे था तुझको कभी...
मैं खोने की हसरत से तुझसे मिला था..
तो खो के भी मैंने बोहोत कुछ था पाया...
ज़रा-सा लिखा और बोहोत कुछ मिटाया..
आलम यूँ दिल का बख़ूबी बताया.."
-मयंक
-मयंक
Saturday, January 5, 2013
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