दिल कहीं छुपता रहे...
अपनो से रुसवा रहे..
हो ज़हन में ज़ख्म भी तो अश्क़ से सीता रहे...
दिल कहीं छुपता रहे...
अपनो से रुसवा रहे..
ग़म तो सबको है यहाँ..
ये काफ़िला ग़मगीन है,
क्यूँ कहूँ फिर आँख का आँसू बड़ा नमकीन है??
बस यही गुनता रहे..
अपनी ही सुनता रहे...
दिल कहीं छुपता रहे...
अपनो से रुसवा रहे..
-मयंक
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