चाहत भी बेवफ़ाई भी
इक साथ कर रहा हूँ मैं।
चाहत भी बेवफ़ाई भी, इक साथ कर रहा हूँ मैं।
मुझ जैसा काफ़िराना तो सारे जहां में क्या होगा...
पर मैंने वफ़ाएं भी की हैं
थोड़ी जफ़ा से क्या होगा??
मैंने वफ़ाएं भी की हैं तो थोड़ी जफ़ा से क्या होगा!
मेरे गुनाह माफ़ हों
दरखास्त कर रहा हूँ मैं,
जिसे दुनिया गुनाह कहती है, हर बार कर रहा हूँ मैं।
जिसको भी देखा शहर में, उलझा हुआ ही पाया...
दिल को जला के ढूँढता
अपने ही दिल का साया।
दिल को जला के ढूँढता, अपने ही दिल का साया।
हम तो अलग थे भीड़ से, इन सब से थे जुदा-जुदा
ताल्लुक शहर से जो हुआ,
हम खुद भी भीड़ बन गए।
ताल्लुक शहर से जो हुआ, हम खुद भी भीड़ बन गए
जिसे दुनिया सुकून कहती है, ठोकर में दे रहा हूँ मैं,
पल-पल में मर के ज़िन्दगी
हर मौत जी रहा हूँ मैं।
जिसे दुनिया गुनाह कहती है, हर बार कर रहा हूँ मैं।
