Thursday, June 13, 2013

रागिनी



कुछ अंधेरों के लिए फीकी-फीकी रौशनी
कुछ सितारों के लिए धीमी-धीमी चांदनी
ठीक इस तरह ही काफ़ी होती है मेरे लिए
तेरे दिल की रागिनी..
राग जो धड़कन में है।

कुछ बसेरों के लिए झीनी-झीनी चादरें
कुछ बहारों के लिए भीनी-भीनी बारिशें
ठीक इस तरह ही काफ़ी होती हैं मेरे लिए
तेरे दिल की रागिनी..
राग जो धड़कन में है।

कुछ सदी कड़वी लगी थी, पल को कुछ बेस्वाद सी...
तुम मिली आबाद-सी थी, अब है ये बर्बाद-सी
ज़िन्दगी का ज़ायका सारा-सभी बस तुझमें है
किस तरह तुझको बताऊँ क्या कमी अब मुझ में है।

कुछ नगीनों के लिए तीखी-तीखी सी चमक
चंद सिक्कों के लिए खनखनाती सी खनक
ठीक इस तरह ही काफ़ी होती है मेरे लिए
तेरे दिल की रागिनी..राग जो अब अब मुझमें है।

Friday, June 7, 2013

Alfaaz#3


ये बदलेगा पैंतरे अगली चाल देखिएगा
चुप रहिएगा इश्क़ के कमाल देखिएगा।

हो-हल्ला मचेगा दिलों में भी फिर से
मोहोब्बत की अगली बिसात देखिएगा
चुप रहिएगा इश्क़ के कमाल देखिएगा।
ये बदलेगा पैंतरे अगली चाल देखिएगा...

मुहब्बत की ये दासताँ है पुरानी
मुहब्बत की ही बात है हर ज़ुबानी
मोहोब्बत है तूफां, मोहोब्बत है आँधी
मोहोब्बत में आशिक़ तो होता है बाग़ी।
कभी इक़रार, कभी इनकार, कभी तक़रार देखिएगा...
ये बदलेगा पैंतरे अगली चाल देखिएगा...

चुप रहिएगा इश्क़ के कमाल देखिएगा।