Saturday, September 21, 2013

इस शहर की बात बड़ी है


फुर्सत भी है फुर्सत में तो जल्दी को भी क्या पड़ी है
ये छोटे शहर की बात है, इस शहर की बात बड़ी है।
सुबह की ठंडी पुरवा में मिट्टी की भीनी ख़ुशबू
मंदिर में बजती घंटियाँ, हर ओर अज़ान का जादू...
हर शख्स यहाँ पहचानता है, हर शख्स को अपना मानता है
बातों में तू-तू-मैं-मैं है, नियत पर साफ़ बड़ी है... 
ये छोटे शहर की बात है, इस शहर की बात बड़ी है।
ये सच हमने तब जाना जब वो शहर हमारा छुट गया,
मासूम-सा वो इक बच्चा था, हम लौटे तो वो रूठ गया...
क्या कह के उसे मनाते हम? टॉफी दी..फिर भी ना माना,
हमको ये समझते देर लगी कर चूका वो हमको बेग़ाना..
हमको ये समझते देर लगी कर चूका वो हमको बेग़ाना।
वो फिर हमको अपनाएगा, इस दिल को आस बड़ी है
ये छोटे शहर की बात है, इस शहर की बात बड़ी है।

Wednesday, September 4, 2013

Dekhi Humne Yaar Ye Duniya


देखी हमने यार ये दुनिया...
नफ़रत की तक़रार की दुनिया,
सब कहते हैं जन्नत जिसको,
बे-मतलब बेकार की दुनिया।
देखी हमने यार ये दुनिया...
नफ़रत की तक़रार की दुनिया।

एक लहर सौ कहर समेटे
गुमसुम सी चुपचाप सी दुनिया,
इक पल में घनघोर तबाही
बेदर्दी जल्लाद सी दुनिया।

देखी हमने यार ये दुनिया...
नफ़रत की तक़रार की दुनिया,
सब कहते हैं जन्नत जिसको,
बे-मतलब बेकार की दुनिया।