देखी हमने यार ये दुनिया...
नफ़रत की तक़रार की दुनिया,
सब कहते हैं जन्नत जिसको,
बे-मतलब बेकार की दुनिया।
देखी हमने यार ये दुनिया...
नफ़रत की तक़रार की दुनिया।
एक लहर सौ कहर समेटे
गुमसुम सी चुपचाप सी दुनिया,
इक पल में घनघोर तबाही
बेदर्दी जल्लाद सी दुनिया।
देखी हमने यार ये दुनिया...
नफ़रत की तक़रार की दुनिया,
सब कहते हैं जन्नत जिसको,
बे-मतलब बेकार की दुनिया।
नफ़रत की तक़रार की दुनिया।
एक लहर सौ कहर समेटे
गुमसुम सी चुपचाप सी दुनिया,
इक पल में घनघोर तबाही
बेदर्दी जल्लाद सी दुनिया।
देखी हमने यार ये दुनिया...
नफ़रत की तक़रार की दुनिया,
सब कहते हैं जन्नत जिसको,
बे-मतलब बेकार की दुनिया।

kavita achhi hai...wakai achha likha hai
ReplyDeleteThanx :)
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