फुर्सत भी है फुर्सत में तो जल्दी को भी क्या पड़ी है
ये छोटे शहर की बात है, इस शहर की बात बड़ी है।
सुबह की ठंडी पुरवा में मिट्टी की भीनी ख़ुशबू
मंदिर में बजती घंटियाँ, हर ओर अज़ान का जादू...
हर शख्स यहाँ पहचानता है, हर शख्स को अपना मानता है
बातों में तू-तू-मैं-मैं है, नियत पर साफ़ बड़ी है...
ये छोटे शहर की बात है, इस शहर की बात बड़ी है।
ये सच हमने तब जाना जब वो शहर हमारा छुट गया,
मासूम-सा वो इक बच्चा था, हम लौटे तो वो रूठ गया...
क्या कह के उसे मनाते हम? टॉफी दी..फिर भी ना माना,
हमको ये समझते देर लगी कर चूका वो हमको बेग़ाना..
हमको ये समझते देर लगी कर चूका वो हमको बेग़ाना।
वो फिर हमको अपनाएगा, इस दिल को आस बड़ी है
ये छोटे शहर की बात है, इस शहर की बात बड़ी है।

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