Thursday, October 17, 2013

बेतहाशा



तुमको खोने के महज़ एहसास भर से डरते थे.…
तुमको खोने के महज़ एहसास भर से डरते थे,
यार तुमको प्यार तब हम बेतहाशा करते थे...

यार तुमको प्यार तब हम बेतहाशा करते थे। 


क्या कभी बन पाऊँगा क़ाबिल मैं मेरे यार के?
पूरे भी कर पाऊँगा वादे सभी इस प्यार के??
क्या कभी अपने ये अरमां भी हक़ीक़त पायेंगे?
क्या जुदा होके दोबारा हम कभी मिल पाएंगे??

क्या जुदा होके दोबारा हम कभी मिल पाएंगे??

इन सवालों के जवाबों को तलाशा करते थे...
इन सवालों के जवाबों को तलाशा करते थे,
यार तुमको प्यार तब हम बेतहाशा करते थे|

ये कमी इस दिल को इक दिन तो ख़लेगी था पता,
रात की तन्हाई नागिन है डसेगी था पता.…
दर्द आँखों से पीयेंगे कैसे ये सोचा ना था,
यार तेरे बिन जियेंगे कैसे ये सोचा ना था...

यार तेरे बिन जियेंगे कैसे ये सोचा ना था|

तेरे हर अंदाज़ को खुद में तलाशा करते थे,
तेरे हर अंदाज़ को खुद में तलाशा करते थे.…

यार तुमको प्यार तब हम बेतहाशा करते थे।

तुमको खोने के महज़ एहसास भर से डरते थे
यार तुमको प्यार तब हम बेतहाशा करते थे...
बेतहाशा करते थे.…

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