Wednesday, November 27, 2013

बता ज़रा



सज़ा.. मिली…मुझे.. बता.. 
तुझसे किस बात की ??
क़दर भी ना ज़रा-सी की 
मेरे जज़्बात की!!

सज़ा.. मिली…मुझे.. बता.. 
तुझसे किस बात की ??

मेरा होना, या न होना
एक जैसा हसना रोना
मेरे लिए तू ही सब था,
तुझको खोना सबको खोना।

ख़िज़ा मिली बहार से
मुझे सौगात-सी!!
क़दर भी ना ज़रा-सी की
मेरे जज़्बात की!!
सज़ा.. मिली…मुझे.. बता..
तुझसे किस बात की ??

पत्थरों-सा तो नहीं था दिल तेरा
ये था पता,
साहिलों की रेत थी और नाम मेरा
था लिखा।
तेरे जज़बातों कि लहरों में समंदर का जुनूँ
बस यही डर था कि इक दिन लूटेगा मेरा सुकूँ।
बस यही डर था कि इक दिन लूटेगा मेरा सुकूँ..

ख़फ़ा हुई यूँ ज़िन्दगी
मुझसे बिन बात ही...
क़दर भी ना ज़रा-सी की
मेरे जज़्बात की!!
सज़ा.. मिली…मुझे.. बता..
तुझसे किस बात की ??
क़दर भी ना ज़रा-सी की 
मेरे जज़्बात की!!

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