Keh Diye
Monday, March 31, 2014
मेरी कलम
परेशान-सी है आज ये कलम मेरी
उलझनों में फँसी आज है कलम मेरी
सौ लफ्ज़ समेटे नोक पे....
चुपचाप-सी है आज कलम मेरी
कलम बेबस-सी है पर अब ख़ुश रहना है
बहुत हो चुकी ख़ामोशी अब कुछ कहना चाहती है।
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