Tuesday, April 22, 2014

मन मिर्ज़ा तन साहिबा


मन मिर्ज़ा तन साहिबा
ना था पता हो जाएगा…
मन मिर्ज़ा तन साहिबा, ना था पता हो जाएगा…
इश्क़ सुकूँ देता है सबको…
इश्क़ सुकूँ देता सबको ये मुवा मुझे तड़पाएगा।
मन मिर्ज़ा तन साहिबा
ना था पता हो जाएगा…

तेरी गली-चौबारे-चौखट 
मिलने तुझसे आई थी…
तेरी गली-चौबारे-चौखट मिलने तुझसे आई थी…
मुझको मिर्ज़ा से मिलवा दो झोली भी फैलाई थी,
सारी सदाएँ मेरी ज़ाया सारी दुवाएँ मेरी ज़ाया 
ज़ख्मी दिल ले कर के आई ज़ख़्मी-ज़ख़्मी रूह की काया,
ज़ख्मी दिल ले कर के आई
ज़ख़्मी-ज़ख़्मी रूह की काया…

तू जो मुझे मिल जाए मिर्ज़ा…
तू जो मुझे मिल जाए माहि दिल को मरहम मिल जाएगा…
मन मिर्ज़ा तन साहिबा…

मन मिर्ज़ा तन साहिबा
ना था पता हो जाएगा…
मन मिर्ज़ा तन साहिबा, ना था पता हो जाएगा…
इश्क़ सुकूँ देता है सबको…
इश्क़ सुकूँ देता सबको ये मुवा मुझे तड़पाएगा।
मन मिर्ज़ा तन साहिबा।

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