Friday, March 29, 2013

ऐ दिल


जाने कैसे ये रिश्ते तुझको पसंद आते हैं दिल
वो जो होते हैं अपने अजनबी बन जाते हैं दिल,
उनकी बातों पे आज भी भरोसा है तुझको 
बात करके जो हर बार मुकर जाते हैं दिल...

जाने कैसे ये रिश्ते तुझको पसंद आते हैं दिल।

मुझको अब तक यकीं नहीं ये हो रहा ख़ुद पे
के उनको फिर भी मैंने सीने में बसाया है,
वो जो मरहम हैं देते फिर से ज़ख्म देने को...
दिल में रह कर ही क़त्ल-ए-आम जो कर जाते हैं दिल। 

जाने कैसे ये रिश्ते तुझको पसंद आते हैं दिल।

Thursday, March 21, 2013

ये मैं हूँ।


भला भी हूँ मैं..बुरा भी हूँ
मिला-मिला सा...जुदा भी हूँ,
कुछ रंग में तेरे मैं...हूँ रंगा हुआ सा..
गुमनाम गलियों से..बदरंग भी हूँ।

भला भी हूँ मैं, बुरा भी हूँ
मिला-मिला सा, जुदा भी हूँ
 
नाज़ुक-सा दिल खुरदुरा भी है...
अपनों का मगर रहनुमा भी है,
रिश्ते पाए इसे गुमाँ भी है
फिर भी कोना कोई सूना भी है,
नादान हूँ मैं, सरफिरा भी हूँ,
दुनियाँ की नज़र में...हाँ, गिरा भी हूँ।
 
भला भी हूँ मैं, बुरा भी हूँ
मिला-मिला सा, जुदा भी हूँ
 
कुछ रंग में तेरे मैं हूँ रंगा हुआ सा,
गुमनाम गलियों से बदरंग भी हूँ।
भला भी हूँ मैं, बुरा भी हूँ
मिला-मिला सा, जुदा भी हूँ।

-मयंक 

Tuesday, March 19, 2013

भुला दी

कहना था तुमसे...दिल का राज़,
कहती जो आहें..मेरे सारे जज़्बात।
हम मिले तुमसे..हुई शुरुवात
महके से दिन थे.. बहकी-बहकी-सी रात,
होना था क्या इस से हम बे-ख़बर
इश्क़ है कितना बेसबर
था तेरा ही ये असर था...... 
भुला दी.. तेरी हर सदा भी,
हाँ जिसपे फ़िदा थी... मेरी ज़िन्दगी,
भुला दी, तेरी हर सदा भी...
हाँ जिसपे फ़िदा थी...मेरी ज़िन्दगी...

मेरी हर ख़ुशी!!

ग़म हमें भी है...जो भी हुआ
तुझपे यकीं था..तू बे-वफ़ा हुआ,
सख्त है दिल भी उसके बाद...
चाहा ना फिर यूँ 
चाहा तुझे जिस तरह...
होना था क्या इस से हम बे-ख़बर..
इश्क़ है कितना बेसबर..
था तेरा ही ये असर था... 
भुला दी...तेरी हर सदा भी,
हाँ जिसपे फ़िदा थी...मेरी ज़िन्दगी,
मेरी हर ख़ुशी!!

-मयंक

Saturday, March 16, 2013

जुदाई



होनी थी गर जुदाई.. मजबूरियों से होती,
इस बात की ज़रा सी हमको ख़बर तो होती..

ग़म हमको तब ना होता, तुम इस तरह ना रोती
तन्हा  फ़लक के तारे आँखों में भर ना सोती,
होनी थी गर जुदाई.. मजबूरियों से होती।

ताज्जुब हमें ये है बस इक हम ही बे-ख़बर थे
वर्ना ये बात अब तक सबको पता ना होती।
होनी थी गर जुदाई.. मजबूरियों से होती,
इस बात की ज़रा सी हमको ख़बर तो होती।
-Mayank 

Friday, March 15, 2013

सवाल



अब ना है कोई तीर भी ना ही कोई कमान है

जाने क्यूँ हर निगाह में फिर भी कई सवाल हैं?

रंजिश थे जो निभा चले उनको गले लगा लिया
दुश्मन के मन को जीत कर अपना उन्हें बना लिया,
अब ना है कोई जीत में ना ही किसी की हार है
किस हक़ में होगा फ़ैसला फिर भी ये इंतज़ार है।

अब ना है कोई तीर भी ना ही कोई कमान है
जाने क्यूँ हर निगाह में फिर भी कई सवाल हैं?
-Mayank

Thursday, March 14, 2013

तेरी याद में


रात भर तेरी याद में हम सहर देखते रहे
बेसब्र इंतज़ार की इन्तहा देखते रहे।

रात भर तेरी याद में हम सहर देखते रहे...

पीली सरसों की बालियाँ, गोरे गालों की लालियाँ
और इस जवाँ-सी रात को रात भर देखते रहे।

रात भर तेरी याद में हम सहर देखते रहे...

तुम को तो ये खबर नहीं तुम को कहाँ बसाया है
दुनिया की सारी नज़रों से हमने तुम्हे छुपाया है।

इक तेरे'ही दीदार में हमसफर देखते रहे 
रात भर तेरी याद में हम सहर देखते रहे।
-Mayank Thapliyal

Wednesday, March 13, 2013

एहसास


वो रौशनी का क़तरा है या अँधेरे पे दाग़ है
जलती है, ठण्ड देती है, जाने ये कैसी आग है।
है कौन साया बनके जो रहनुमा मेरे साथ है
दिखता नहीं है वो ख़ुदा होता जो आस-पास है।