अब ना है कोई तीर भी ना ही कोई कमान है
जाने क्यूँ हर निगाह में फिर भी कई सवाल हैं?
रंजिश थे जो निभा चले उनको गले लगा लिया
दुश्मन के मन को जीत कर अपना उन्हें बना लिया,
अब ना है कोई जीत में ना ही किसी की हार है
किस हक़ में होगा फ़ैसला फिर भी ये इंतज़ार है।
अब ना है कोई तीर भी ना ही कोई कमान है
जाने क्यूँ हर निगाह में फिर भी कई सवाल हैं?
-Mayank

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