Saturday, March 16, 2013

जुदाई



होनी थी गर जुदाई.. मजबूरियों से होती,
इस बात की ज़रा सी हमको ख़बर तो होती..

ग़म हमको तब ना होता, तुम इस तरह ना रोती
तन्हा  फ़लक के तारे आँखों में भर ना सोती,
होनी थी गर जुदाई.. मजबूरियों से होती।

ताज्जुब हमें ये है बस इक हम ही बे-ख़बर थे
वर्ना ये बात अब तक सबको पता ना होती।
होनी थी गर जुदाई.. मजबूरियों से होती,
इस बात की ज़रा सी हमको ख़बर तो होती।
-Mayank 

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