मिला-मिला सा...जुदा भी हूँ,
कुछ रंग में तेरे मैं...हूँ रंगा हुआ सा..
कुछ रंग में तेरे मैं...हूँ रंगा हुआ सा..
गुमनाम गलियों से..बदरंग भी हूँ।
भला भी हूँ मैं, बुरा भी हूँ
भला भी हूँ मैं, बुरा भी हूँ
मिला-मिला सा, जुदा भी हूँ
नाज़ुक-सा दिल खुरदुरा भी है...
अपनों का मगर रहनुमा भी है,
रिश्ते पाए इसे गुमाँ भी है
फिर भी कोना कोई सूना भी है,
नादान हूँ मैं, सरफिरा भी हूँ,
रिश्ते पाए इसे गुमाँ भी है
फिर भी कोना कोई सूना भी है,
नादान हूँ मैं, सरफिरा भी हूँ,
दुनियाँ की नज़र में...हाँ, गिरा भी हूँ।
भला भी हूँ मैं, बुरा भी हूँ
मिला-मिला सा, जुदा भी हूँ
कुछ रंग में तेरे मैं हूँ रंगा हुआ सा,
गुमनाम गलियों से बदरंग भी हूँ।
भला भी हूँ मैं, बुरा भी हूँ
भला भी हूँ मैं, बुरा भी हूँ
मिला-मिला सा, जुदा भी हूँ।
-मयंक
-मयंक

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