Tuesday, March 19, 2013

भुला दी

कहना था तुमसे...दिल का राज़,
कहती जो आहें..मेरे सारे जज़्बात।
हम मिले तुमसे..हुई शुरुवात
महके से दिन थे.. बहकी-बहकी-सी रात,
होना था क्या इस से हम बे-ख़बर
इश्क़ है कितना बेसबर
था तेरा ही ये असर था...... 
भुला दी.. तेरी हर सदा भी,
हाँ जिसपे फ़िदा थी... मेरी ज़िन्दगी,
भुला दी, तेरी हर सदा भी...
हाँ जिसपे फ़िदा थी...मेरी ज़िन्दगी...

मेरी हर ख़ुशी!!

ग़म हमें भी है...जो भी हुआ
तुझपे यकीं था..तू बे-वफ़ा हुआ,
सख्त है दिल भी उसके बाद...
चाहा ना फिर यूँ 
चाहा तुझे जिस तरह...
होना था क्या इस से हम बे-ख़बर..
इश्क़ है कितना बेसबर..
था तेरा ही ये असर था... 
भुला दी...तेरी हर सदा भी,
हाँ जिसपे फ़िदा थी...मेरी ज़िन्दगी,
मेरी हर ख़ुशी!!

-मयंक

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