Tuesday, April 30, 2013

अलफ़ाज़-2


"तितलियों के रंग हैं..जितने सारे संग हैं..तेरे ख़्वाबों के
खुशबुवें हैं बाग़ों में..छू हवा चली है जो तेरे.. बालों से,
ये सारे रूप-रंग खूबसूरती-उमंग..सब हैं घबराये हैरान से
के जबसे तुम हो आई..दुनिया इनको भूली हाय
नाम लेते हैं सभी तेरा मिसालों में...
नाम लेते हैं सभी तेरा मिसालों में।"

Monday, April 29, 2013

तेरी हसरतें


थी तेरी निगाहों से आज़ादी चाही
मैं फिर से पनाहें तेरी चाहता हूँ,
बसा दिल में या फिर मुझे आ के कस ले
मैं फिर से तेरी हसरतें चाहता हूँ।
मैं फिर से पनाहें तेरी चाहता हूँ
हाँ, फिर से पनाहें तेरी चाहता हूँ।

ना ही उम्र से, रूप से, रंग से
चहरे-मोहरे बदलने से भी कम ना होगा
इबादत सा है तुझसे ये प्यार मेरा..
मैं करता रहूँगा, ये बढ़ता रहेगा।

मैं बिछड़ा जो तुझसे भुला डाला सब कुछ
हाँ फिर भी सदाएं तेरी मैं ना भूला,
एक दीवानी मेरी पगली
तेरा पागलपन ना भूला।

कभी गूँजतीं हैं ये कानों में मेरे
ख़ामोश सी बैठ जाती हैं अक्सर,
कभी रूठती हैं, कभी मानती हैं
तेरे बाद अब तो तेरी याद ही हैं।
तेरे बाद अब तो तेरी याद ही हैं...

थी अपने गुनाहों से मांगी रिहाई
मैं फिर से सजाएं वही चाहता हूँ,
बसा दिल में या फिर मुझे आ के कस ले
मैं फिर से तेरी हसरतें चाहता हूँ...
हाँ, फिर से पनाहें तेरी चाहता हूँ।

Friday, April 19, 2013

जीवन जीने को तरस गए


जीवन जीने को तरस गए, आँखों से सपने बरस गए
तुम थे अपने सब थे अपने, तुम क्या बदले सब बदल गए
जीवन जीने को तरस गए, आँखों से सपने बरस गए।

उभरे सपने आँखों से वो पलकों को यूँ छू कर निकले
उस इक छोटे से लम्हे में मेरे बीते सारे कल निकले,

हर कल में यादें हर पल की, हर पल में बातें इस दिल की
इस दिल में तेरी आवाजें..., उन आवाजों को तरस गए।

जीवन जीने को तरस गए, आँखों से सपने बरस गए...

Monday, April 8, 2013

अल्फ़ाज़ #1



एक सदी से ज्यादा लम्बा 
एक घड़ी से कम वो लम्हा,
एक शहर यादों का तेरी 
बसा-बसाया तबाह हुआ। 

कहने को कह डाली हमने
जो ना बात बतानी थी,
एक वो दिल में छुपी रह गई
बात जो कहने वाली थी,

सुर्ख़ लहू के जैसा गहरा
कभी हुआ पानी जैसा,
जिस से जा के मिला कभी तो
घुला वो क़तरा वही हुआ।