Friday, April 19, 2013

जीवन जीने को तरस गए


जीवन जीने को तरस गए, आँखों से सपने बरस गए
तुम थे अपने सब थे अपने, तुम क्या बदले सब बदल गए
जीवन जीने को तरस गए, आँखों से सपने बरस गए।

उभरे सपने आँखों से वो पलकों को यूँ छू कर निकले
उस इक छोटे से लम्हे में मेरे बीते सारे कल निकले,

हर कल में यादें हर पल की, हर पल में बातें इस दिल की
इस दिल में तेरी आवाजें..., उन आवाजों को तरस गए।

जीवन जीने को तरस गए, आँखों से सपने बरस गए...

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