Tuesday, April 30, 2013

अलफ़ाज़-2


"तितलियों के रंग हैं..जितने सारे संग हैं..तेरे ख़्वाबों के
खुशबुवें हैं बाग़ों में..छू हवा चली है जो तेरे.. बालों से,
ये सारे रूप-रंग खूबसूरती-उमंग..सब हैं घबराये हैरान से
के जबसे तुम हो आई..दुनिया इनको भूली हाय
नाम लेते हैं सभी तेरा मिसालों में...
नाम लेते हैं सभी तेरा मिसालों में।"

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