Monday, April 29, 2013

तेरी हसरतें


थी तेरी निगाहों से आज़ादी चाही
मैं फिर से पनाहें तेरी चाहता हूँ,
बसा दिल में या फिर मुझे आ के कस ले
मैं फिर से तेरी हसरतें चाहता हूँ।
मैं फिर से पनाहें तेरी चाहता हूँ
हाँ, फिर से पनाहें तेरी चाहता हूँ।

ना ही उम्र से, रूप से, रंग से
चहरे-मोहरे बदलने से भी कम ना होगा
इबादत सा है तुझसे ये प्यार मेरा..
मैं करता रहूँगा, ये बढ़ता रहेगा।

मैं बिछड़ा जो तुझसे भुला डाला सब कुछ
हाँ फिर भी सदाएं तेरी मैं ना भूला,
एक दीवानी मेरी पगली
तेरा पागलपन ना भूला।

कभी गूँजतीं हैं ये कानों में मेरे
ख़ामोश सी बैठ जाती हैं अक्सर,
कभी रूठती हैं, कभी मानती हैं
तेरे बाद अब तो तेरी याद ही हैं।
तेरे बाद अब तो तेरी याद ही हैं...

थी अपने गुनाहों से मांगी रिहाई
मैं फिर से सजाएं वही चाहता हूँ,
बसा दिल में या फिर मुझे आ के कस ले
मैं फिर से तेरी हसरतें चाहता हूँ...
हाँ, फिर से पनाहें तेरी चाहता हूँ।

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