"कुछ दिन से उन पे यूँ शक़ हो रहा है,
ताज्जुब कि ये अचानक हो रहा है।
और प्यार भी आ रहा है वहीँ पे,
दिल ये जहां पे यकीं खो रहा है।
कुछ दिन से उन पे यूँ शक़ हो रहा है।
वो हैं बे-वफ़ा नाम की है वफ़ाई
दिल से खेले बोहोत हैं वो पक्के खिलाड़ी,
हैं दर्द देते परखने को शायद
वो खुश रहें है ये दिल की क़वायद।
हमसे तकाज़ा ये अब हो रहा है
रह-रह के हम पर सितम हो रहा है,
कुछ दिन से उन पे यूँ शक़ हो रहा है,
ताज्जुब कि ये अचानक हो रहा है।"
-मयंक
ताज्जुब कि ये अचानक हो रहा है।
और प्यार भी आ रहा है वहीँ पे,
दिल ये जहां पे यकीं खो रहा है।
कुछ दिन से उन पे यूँ शक़ हो रहा है।
वो हैं बे-वफ़ा नाम की है वफ़ाई
दिल से खेले बोहोत हैं वो पक्के खिलाड़ी,
हैं दर्द देते परखने को शायद
वो खुश रहें है ये दिल की क़वायद।
हमसे तकाज़ा ये अब हो रहा है
रह-रह के हम पर सितम हो रहा है,
कुछ दिन से उन पे यूँ शक़ हो रहा है,
ताज्जुब कि ये अचानक हो रहा है।"
-मयंक

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