Tuesday, December 18, 2012

सपना तेरा


"कौन लिखता है नींदों में सपना तेरा...
सपना तेरा,
बंद आँखों को नज़र चेहरा तेरा...
चेहरा तेरा।

क्या सुबह क्या सहर, क्या घड़ी क्या पहर,
दिल-जिगर हर पहर..पहरा तेरा...
पहरा तेरा!!
बंद आँखों को नज़र चेहरा तेरा...
चेहरा तेरा,
कौन लिखता है नींदों में सपना तेरा??
सपना तेरा।

तुम ख़ूब हो ख़ूबी तुम्हारी सादगी में ख़ूब है..
तुम हुस्न हो उस हुस्न का जो ख़ुद तुझही में  चूर है,
मय भी हो तुम प्याला भी तुम...
पी कर खुदही मदहोश तुम...
आँखों से चख ली थी अभी
संभला नहीं है होश गुम...
आँखों से चख ली थी अभी...संभला नहीं है होश गुम।

है असर गहरा तेरा..है असर गहरा तेरा।
बंद आँखों को नज़र चेहरा तेरा..
चेहरा तेरा।
कौन लिखता है नींदों में सपना तेरा..
सपना तेरा।"
-मयंक

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