Thursday, December 27, 2012

तुम उदासी ये बता दो


"तुम उदासी..हो ज़रा सी..आज खुश क्यूँ..
ये बता दो।
रूखी पलकों..में नमीं सी..क्यूँ है बाक़ी
ये बता दो।
ये ख़ुशी के मोती समझूँ...
या के ग़म के छींटे??
दोनों ही एहसास दिल में, जाने जिस पे बीते।
तुम कहानी .. हो ज़रा-सी.. क्यूँ पुरानी..
ये बता दो।
बार जितनी..हूँ मैं पढ़ता...
लगती ताज़ी क्यूँ, बता दो।
तुम उदासी..हो ज़रा सी..आज खुश क्यूँ..
ये बता दो।"

No comments:

Post a Comment