Sunday, December 16, 2012

माँ

आ माँ मुझको सुला दे फिर से तेरे लाल बिछौने में
बीता मेरा सार  बचपन जिस अंगने के कोने में,
आ माँ मुझको सुला दे फिर से तेरे लाल बिछौने में।

जिस पलने में टिमटिमाती अंखियों से तुझे तकता था
तेरे ही आँचल में थी निंदिया, तेरी ही गोद में जगाता था,
तेरी ही गोद में जगाता था.............

अब जब वो सब याद करूँ दिल लगता है बस रोने में
कैसी पीड़ा सहता है कोई अपनी माँ को खोने में.......
अपनी माँ को खोने में।

आ माँ मुझको सुला दे फिर से तेरे लाल बिछौने में।
-मयंक

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