"वो जब चला, कुछ यूँ चला, चलता चला, वो मनचला।
अपनी ख़ुशी, अपनी हँसी, जाना यही, बस हर जगह।
रुक के कभी सुस्ता लिया, इस दिल को भी बहला लिया,
जिस से मिला खुल के मिला, सीने से खुद के लगा लिया।
जितनी ख़ुशी लेके चला, वो साथ ग़म देता चला....
वो जब चला, कुछ यूँ चला, चलता चला, वो मनचला।"
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