"आज रोने को मन किया..
कल पलकें भी भीगेंगी
धुल जाएंगी यादें
तमन्ना कुछ पल को तो चीखेगी...
खोने का ग़म रहेगा ये कब तक..
साँसों का सिलसिला शायद है जब तक..
जागती रातों में..
तेरी बाहों में..
बीती रातों सी मुलाक़ात का मन किया..
बुला लिया..ख्वाबों में तुम्हे..
आज सोने को मन किया|
आज रोने को मन किया.."
-मयंक

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